◆आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों का सुरक्षा कवच....शेष-2◆
✍चर्चा जारी है कि किस तरह आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों को सेवाओं में बने रहने के लिए सुरक्षा कवच है।
अब बात करते हैं आरटीई एक्ट के प्रावधानों को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार ने एनसीटीई एक्ट में 2011 में संशोधन कर दिया। ये बात अलग कि "लोग" संशोधन पत्र जारी करवाने के लिए अभी भी एमएचआरडी और एनसीटीई कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
और वो संशोधन इस प्रकार है:-
the Bench of three learned Judges of the Supreme Court, Parliament enacted Amending Act 18 of 2011 to provide for the insertion of Section 12-A into the NCTE Act of 1993.
इस में कहा गया कि that nothing in the Section shall affect adversely the continuance of any person recruited under a rule, regulation or order of the Central or State Government or local or other authority,
जो पहले से नियुक्त शिक्षक के रूप में कार्य करने वाले लोग अगर 23.8.2010 के एनसीटीई रेगुलेशन में निर्धारित योग्यता जैसे टेट आदि पूरी न कर रहे हो तो इस का बुरा प्रभाव उन पर न पड़े। उनको नौकरी से न हटाया जाय।
✍ये बात अलग कि इस पर हाई कोर्ट की फुल बैंच में बहस हो चुकी है और कोर्ट मे शिक्षामित्रों अपने आप को सिद्ध न कर सके और कोर्ट ने इस दलील को ख़ारिज कर दिया।
लेकिन ये तथ्य अपनी जगह अटल है कि ये प्राविधान और संशोधन सिर्फ शिक्षामित्रों के लिए किया गया था। जिस के प्रमाण हमारे पास उपलब्ध हैं। और सुप्रीम कोर्ट में हम इन्हें दाखिल कर रहे हैं। जीत ही हमारा एक मात्र लक्ष्य है
✍हमें उम्मीद है इन तथ्यों की रौशनी में आरटीई एक्ट का सुरक्षा घेरा और मज़बूत होने का अहसास आप को हो गया होगा।
….............शेष कल
✍रबी बहार**&केसी सोनकर और साथी*।।
Thursday, June 23, 2016
आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों का सुरक्षा कवच....शेष-3
आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों का सुरक्षा कवच....शेष-2
◆आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों का सुरक्षा कवच....शेष-2◆
✍कल हमने चर्चा की कि आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों को सेवाओं में बने रहने के लिए सुरक्षा कवच है।✍●कहने की ज़रूरत नहीं कि आरटीई एक्ट लागु होने से पहले और लागू होने के बाद देश भर के संविदा शिक्षकों को अप्रशिक्षित अध्यापक ही बताया गया। और आरटीई एक्ट में इन् के लिए 6 माह के अंदर शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का प्राविधान किया गया। और यहाँ से आरटीई एक्ट ने सुरक्षा घेरा बनाना शुरू किया।
●कल हमने विदेशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट्स को आधार बना कर विश्लेषण किया। इस पर कोई ये भी कह सकता है कि विदेशों से फंडिंग करवाने के लिए ये बातें कही होंगी‼
तो ठीक है हम एमएचआरडी में आयोजित राज्यों की बैठक में लिए गए निर्णय की बात करते हैं।
वर्ष 2010 में आरटीई एक्ट लागू होने से पहले एमएचआरडी की तत्कालीन अतिरिक्त सचिव और वर्तमान एनसीटीई की चेयरमैन रीना रॉय ने प्रस्ताव पास करते हुए कहा कि
●अब आरटीई एक्ट लागू किया जाना है और इस में 6 माह में अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण शुरू कराने का प्रावधान है।
इस स्थिति में
"हमें आरटीई एक्ट में निर्धारित किये गए समय अनुसार हमें शिक्षक प्रशिक्षण की रूप रेखा तैयार करना है ये फेस टू फेस न होकर अनुभव आधारित होगा। इसे दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है।"
✍यहाँ राज्य के प्रतिनिधियों ने जानकारी देते हुए दिशा निर्देश मांगे और कहा:-
" देश के एडिड और सरकारी स्कूलों में कुल 9.62 लाख टीचर हैं जिनमे 16% नियमित शिक्षक 69% पैरा टीचर हैं।"
रीना जी ने इनका समाधान ये किया कि इनको आरटीई एक्ट अनुसार दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण दिलाया जायेगा और "इस कोर्स को मान्यता और अनुमति देने की ज़िम्मेदारी एनसीटीई को दी जा चुकी है, कुछ राज्य ने इस बारे में अप्लाय भी करना शुरू कर दिया है।।"
✍हमें उम्मीद है इन तथ्यों की रौशनी में आरटीई एक्ट का सुरक्षा घेरा और मज़बूत होने का अहसास आप को हो गया होगा।
….............शेष कल
✍रबी बहार**&केसी सोनकर और साथी*।।
आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों का सुरक्षा कवच
◆आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों का सुरक्षा कवच◆
✍आरटीई एक्ट शिक्षामित्रों को सेवाओं में बने रहने के लिए सुरक्षा कवच है।
बीएड और बीटीसी अभ्यर्थी इस तर्क से सहमत नहीं हों तो कोई बात नहीं क्योंकि उनके निजी स्वार्थ हैं। अचरज की बात ये कि बहुत से शिक्षामित्र भी इससे सहमत नहीं हैं। क्योंकि वे अधिकांश तथ्यों से वाकिफ नहीं हैं।
✍शायद यही कारण है कि अब तक डाली गई सभी एसएलपी में आरटीई एक्ट के सिर्फ एक ही बिंदु को उठाया गया है।
तो आइये विश्लेषण करते हैं:-
✍क्या आरटीई एक्ट फरवरी 2010 को लागु हुआ?
नहीं। ये एक अप्रैल 2010 को लागू हुआ। फिर क्या कारण है कि एनसीटीई के तत्कालीन चेयरमैन मुहम्मद अख्तर सिद्दीकी फरवरी 2010 में ये विश्वबैंक और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों के सामने ये कहते है
The already appointed, untrained teachers also need to be trained without taking them out of school. One model for tackling this
problem involves converting the Block and Cluster Resource Centres established under DPEP and SSA
programme into Block Institutes of Teacher Education (BITEs).
अब कोई बताये ये जो तैयारी की जा रही थी आरटीई लागू होने से पहले वो किस के लिए थी। साफ़ अप्रशिक्षित शिक्षकों अर्थात शिक्षामित्रों के लिये थी।
●अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आने वाले समय की योजना को पेश कर के एमएचआरडी और एनसीटीई ने हमें अप्रशिक्षित अध्यापक घोषित किया।
इस घोषणा के कुछ ही माह बाद 2010 में ही एनसीटीई चेयरमैन सिद्दीकी साहब और एमएचआरडी के डायरेक्टर विक्रम सहाय यूरोपियन संघ यूनेस्को और विश्वबैंक प्रतिनिधियों के समक्ष रिपोर्ट पेश कर के बताते हैं
In this context of the need to train a large number of untrained teachers in a limited time period. These
Untrained teachers recruited at different levels from
a variety of backgrounds, working under diverse conditions.
✍कहने की ज़रूरत नहीं कि आरटीई एक्ट लागु होने से पहले और लागू होने के बाद देश भर के संविदा शिक्षकों को अप्रशिक्षित अध्यापक ही बताया गया। और आरटीई एक्ट में इन् के लिए 6 माह के अंदर शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का प्राविधान किया गया। और यहाँ से आरटीई एक्ट ने सुरक्षा घेरा बनाना शुरू किया।
….............शेष कल
✍रबी बहार**&केसी सोनकर और साथी*।।
72825 भर्ती एक राजनैतिक अनुकम्पा।।
"72825" एक राजनैतिक अनुकम्पा‼
✍बीएड का बेसिक स्कुल में नौकरी पाना एक अवैध घुसपैठ है। और ये घुसपैठ कब कब और कैसे हुई आइये इस की पड़ताल करते हैं।
बीएड घुसपैठिये बेसिक शिक्षा में वर्ष 1998 में पहली बार एक छोटी सुरंग से दाखिल हुए।
इस के बाद देश में वर्ष 2001-2 एसएसए आ गया और राज्य सरकार ने शिक्षकों की कमी बता कर बीएड भर्ती की एनसीटीई से अनुमति मांगी इस तरह
In this context references are made to Special B.T.C. 2004, 2007-08 and 2010.
तक बीएड की प्राइमरी में घुसपैठ कराई जाती रही।
जिस के लिए सरकार ने 1981 नियमावली में दसवां संशोधन किया।
Government order dated 14th January, 2004 is also made by which Special BTC was initiated for training 46,179 B.Ed./LT/B.P.Ed./C.P.Ed. passed candidates. Relevant paragraphs of the said Government order dated 14th January, 2004 are as follows:-
"In exercise of the powers under Section 19 of the Uttar Pradesh Basic Education Act, 1972 (U.P. Act No.34 of 1972), the Governor is pleased to make the following rules with a view to amending the Uttar Pradesh Basic Education (Teachers) Service Rules, 1981 (1981-LLT-V-147[117]):
1. Short title and commencement. - (1) These Rules may be called the Uttar Pradesh Basic Education (Teachers) Service (Tenth Amendment) Ruiles, 2004.
अब बताते हैं हम इसे घुसपैठ क्यों कह रहे हैं?
क्योंकि केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वर्ष 2010 तक बीएड को बेसिक स्कुल में भर्ती की इज़ाज़त नहीं थी।
✍बस इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने बीएड को बेसिक में भर्ती करने को लेकर क़ानूनी डिक्शनरी में जितने भी घटिया शब्द है सब प्रयुक्त किये। हम अगर अपनी भाषा में कहें तो इनको ..........की तरह दुत्कारा है।
B.Ed is not a substitute for basic teachers training programme. Hence the qualification prescribed for the post of PRT extent or bachelor degree and B.Ed is illegal, unconstitutional and invalid.
आरटीई लागू हो जाने के बाद फिर इनपर राजनैतिक अनुकम्पा हुई और वर्ष 2012 में इन को 72825 के रूप में फिर घुसपैठ कराई गई।
वर्तमान में इनकी घुसपैठ अंतिम है। 72825 को इंट्री मिल गई है इससे एक भी ज़्यादा घुसपैठ नहीं कर सकेगा। अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट के भाग 1व्2 पढ़ें।
✍रबी बहार**&केसी सोनकर और साथी*।।
दूरस्थ बीटीसी कोर्ट की नज़र से।
⚖दूरस्थ बीटीसी : कोर्ट की नज़र से।⚖
जैसा कि आप सब के संज्ञान में हैं कि हम लोगों की तरफ से ट्रेनिंग केस में 2⃣8⃣ अप्रैल की सुनवाई में ज़ोरदार प्रतिवाद की तैयारी की गई है।
✍🏼विरोधियों के सामान्य ज्ञान के लिए बता दूँ कि मात्र उत्तर प्रदेश ही नहीं उड़ीसा और बिहार में भी डीबीटीसी का प्रशिक्षण एससीईआरटी ने ही करवाया है।
खैर बात करते हैं अब तक कोर्ट का इस ट्रेनिंग को लेकर क्या नज़रिया रहा।
⚖वर्ष 2011 में जब ट्रेनिंग शुरू होने जा रही थी तभी से लोगों के सीने पे लोटने लगे थे। मुकदमा हुआ लेकिन
कोर्ट ने तब भी कहा कि नहीं ये सही है।
⚖फिर 12 सितम्बर 2015 का दिन आया बीटीसी वालो अपने बुरे इरादे कामयाब होते नहीं दिखे।
बृहद पीठ ने समायोजन तो रद्द किया लेकिन ट्रेनिंग को वैध ही माना।
⚖इसी दिन 12 सितम्बर को ही उस गधे को भी कोर्ट ने लात मार के भगा दिया।
जिसने 2011 में मुकदमा डाल के ट्रेनिंग पर रोक लगवाने का कुत्सित और असफल प्रयास किया था
✍🏼12 सितम्बर को ही ट्रेनिंग मुद्दे पर संतोष कुमार मिश्र की रिट पर भी सुनवाई कर के सीजे ने ख़ारिज कर दी।
⚖इसी तरह के कई मुक़दमे आते रहे और ख़ारिज होते रहे।
एक मुकद्दमे में तो जज साहब ने ये भी लिख दिया कि :
The purpose of training the untrained Shiksha Mitras is to make them eligible for appointment as Assistant Teachers
⚖ और अंत में ये मुकद्दमा भी खारिज हो के रहेगा।
जिस की सुनवाई 28 अप्रैल को है।
✍🏼©रबी बहार**&केसी सोनकर और साथी*।।
Tuesday, April 1, 2008
ट्रेन की चपेट में आकर युवक की मौत
बरेली जंक्शन पर एक युवक ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया । जी आर पी द्वारा जिला अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
सुभास नगर निवासी सुरेन्द्र सिंह (3४) जब लाइन क्रास कर रहा था ट्रेन की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया । सूचना पाते ही जी आर पी के जवान मौकाऐ वारदात पर पहुंचे और घायल को तुरंत उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए जहाँ पहुँचने से पहले ही घायल ने दम तोड़ दिया.
नाले में डूब कर बालक की मौत
सुभाष नगर में घर के बाहर बह रहे नाले में एक सात वर्षीय बालक गिर गया जिस से उस की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी
बरेली के थाना सुभाष नगर के निवासी नन्हें लाल के सात वर्षीय पुत्र जितेन्द्र की उस वक़्त मौत हो गयी जब वह घर के बाहर बह रहे नाले में गिर गया । जब तक घर वालों को इस बात की जानकारी मिली तब तक बहुत देर हो चुकी थी । नहे लाल मूल रूप से थाना शाही के गांव कुल्छा गौटया का निवासी है। शहर में मेहनत मजदूरी कर अपना भरण पोषण करने वाले इस परिवार का यह एक सहारा था। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है.